🔴 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जन्म-कुंडली...!======!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
🔥 हमारे चचा जनाब नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को अपना माँ जाया भाई मानते थे। टेलिफ़ोन पर नेहरु की हमेशा यही कोशिश होती थी कि वह ख़ुद अपने हाथ से मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को फ़ोन मिलाएँ। एक दिन उन्होंने आपने अपने निजी सचिव एम. ओ. मथाई से कहा कि मौलाना साहब से फ़ोन पर बात कराइए। जब मौलाना ने फ़ोन लिया और नेहरु आए तो उनका पहला जुमला था, "जवाहर लाल क्या तुम्हारी उंगलियों में दर्द हो गया है कि तुम दूसरे से फ़ोन मिलवा रहे हो...???"
🔥 आप फ़ौरन मौलाना का आशय समझ गए और बोले आइंदा से ये ग़लती कभी नहीं होगी...!
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🔴 ... बहुत कम लोगों को पता होगा मौलाना अबुल कलाम आजाद के परदादा बंगाल से 17 वी सदी में ऑटोमन एंपायर में जाकर बस गए थे। तब सऊदी अरब नहीं बना था। तुर्की सऊदी अरब सीरिया यानी मध्य पूर्व के बड़े भू-भाग पर ऑटोमन खलीफाओं का राज था। इनके पिता का नाम मोहम्मद खैरुद्दीन बिन अहमद अल हुसैनी था जो मक्का में एक मस्जिद में पेशे ईमाम थे। इनकी माँ शेखा आलिया बिन्त मोहम्मद सऊदी नस्ल की थी जो मदीना के प्रसिद्ध धर्मगुरु शेख मोहम्मद बिन ज़हीर अल वतरी की बेटी थी।
🔥 मौलाना अबुल कलाम पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु थे और इस्लाम पर कई किताब लिख चुके थे। यदि इदारे की बात की जाए तो मौलाना कट्टर देवबंदी अक़ीदे से आते थे और तबलीगी जमात को इस देश का भाग्यविधाता संगठन मानते थे। देश की आजादी के वक़्त वामपंथियों ने नेहरू से एक समझौता किया देश आप चलाओ सिर्फ शिक्षा हमें चलाने दो। उसके बाद वामपंथियों के दबाव में कट्टर इस्लामिक मौलाना अबुल कलाम को शिक्षा मंत्रालय दिया गया ताकि देश से हिंदुत्व का नामोनिशान मिटाया जा सके।
🔥 जिस कांग्रेस ने सऊदी नागरिक, मक्का में जन्मे और पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना अबुल कलाम आजाद उर्फ़ सैयद अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अल अहमद को आजादी के बाद भारत का पहला शिक्षा मंत्री बनाया था उस कांग्रेस ने एक योगी के मुख्यमंत्री बनने पर अपनी छाती कूटी थी।
🔴 "मैं तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दे रहा था, पर तुम तो बेसब्री में उसका एक टुकड़ा लेकर रह गए...!"
-मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
🔥 अगर मुसलमान उतावला नहीं होता और जल्दबाजी की बजाय धैर्य से काम लेते हुए 1947 में भारत का विभाजन नहीं करवाता तो आज पूरा भारत संसद में प्रस्ताव पारित करवाकर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से पाकिस्तान बन गया होता।
🔥 मौलाना अब्दुल कलाम ने मुसलमानों से कहा भी था, "मैं तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दे रहा था, पर तुम तो बेसब्री में उसका एक टुकड़ा लेकर रह गए।"
🔥 उसके बाद ही यह नारा निकला था, "हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिंदुस्तान।"
🔥 कांग्रेसी शासन काल में मुसलमान एकदम शांत होकर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के वक्तव्य से सीख ले कर चुपचाप कार्य कर रहा था परंतु 2014 में मोदी सरकार के आज आने के बाद भारत के मुसलमान को अपना ख़्वाब टूटता हुआ दिखाई पड़ने लगा। इसके फलस्वरूप भारत का मुसलमान फिर से सब्र नहीं रख पाया और उसने अपना वही वीभत्स चेहरा दिखा दिया जो 1947 से पहले अविभाजित भारत के मुसलमान ने अविभाजित भारत में दिखाया था।
🔥 आज भी मुसलमान बेहद उतावला है। कश्मीर, असम, केरल, तेलंगाना से लेकर बंगाल तक पूरा भारत दारुल-इस्लाम बनाने से बस कुछ ही कदम दूर है, शायद 20 वर्ष से भी कम!
🔥 भगवान ने हिंदुओं को सम्भलने का एक और मौका दिया है और यह मौका अंतिम है।
हिन्दुओ सम्भल जाओ और फिर से ऐसी भूल मत करो जो तुम्हें अपनी भूल को याद करने के लिए भी ज़िंदा न छोड़े!
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🔴 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद--: शिक्षा मंत्री के रूप में कट्टर इस्लामी मुजाहिद.......................
🔥 मौलाना अब्दुल कलाम के पूर्वज लुटेरे बाबर के साथ आये थे जिन्होंने भारत को ख़ूब लूटा था। बाद में मौलाना अबुल कलाम के पूर्वज में बंगाल में जाकर बस गए थे जो पुनः 17 वीं शताब्दी में तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य में जाकर रहने लगे। तुर्की के ख़लीफ़ा का पतन हो जाने के पश्चात् मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का परिवार भारत चला आया और यहां भारत में रहकर तुर्की के ख़लीफ़ा को पुनर्स्थापित करने के लिए ख़िलाफ़त आंदोलन से जुड़ गया। मौलाना आज़ाद देवबंदी इस्लामिक संप्रदाय से आते थे। वही देवबंदी संप्रदाय जो विश्व में उग्र इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है।
🔥 दुनिया को दिखाने के लिए मौलाना अबुल कलाम आज़ाद मौखिक रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता की वक़ालत करते थे लेकिन अंदर ही अंदर भारत के ऊपर इस्लामी हुकूमत का ख़्वाब देखा करते थे। स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री रहते हुए मौलाना आज़ाद ने हर वो काम किया जो इस देश की शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को नष्ट करने के लिए काफ़ी था। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद हिंदी के स्थान पर भारत की राष्ट्रभाषा उर्दू रखना चाहते थे। इसके साथ ही मौलाना आज़ाद अरबी भाषा को भी भारत की भाषाओं में सम्मिलित कराना चाहते थे।
🔥 मौलाना आज़ाद ने ख़िलाफ़त आंदोलन के माध्यम से मुस्लिम समुदाय को और कट्टर बनाया। ख़िलाफ़त आंदोलन का मुख्य उद्देश्य तुर्की के ख़लीफ़ा को फिर से उसके स्थान पर बिठाना था जिसे ब्रिटिश शासकों ने उसके स्थान से पदच्युत कर दिया था। यदि सही रूप में देखा जाये तो ख़िलाफ़त आंदोलन के बाद ही भारत के मुसलमान और उग्र हो गये और भारत में रहने वाले ग़ैर-मुस्लिमों की हत्या करने लगे।
🔥 मौलाना आज़ाद हिन्दू-मुस्लिम एकता के नाम पर हमेशा कट्टरपंथी मुसलमानों को ही भारत के अंदर प्रमोट करते रहे और उनके साथ मिलकर पूरे भारत के इस्लामीकरण का सपना देखते रहे।
🔥 यदि सही मायने में देखा जाये तो मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पूरे भारत को मुग़लिस्तान के रूप में देखना चाहते थे। उन्होंने भारत के इस्लामीकरण की वक़ालत करते हुए कहा था कि-
🔥 "भारत जैसे मुल्क को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रहा चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता है और प्रत्येक मुसलमान का ये फ़र्ज़ है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर से प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करे।"
-बी.आर.नन्दा, गांधी पैन इस्लामिज्म, इम्पीरियालज्म एण्ड नेशनलिज्म, पृ. ११७
🔥 मौलाना अबुल कलाम की इस्लामिक कट्टरता को देखकर ही लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इन्हें कभी राष्ट्रवादी नहीं माना था लेकिन घोर आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस अबुल कलाम आज़ाद को हमेशा हिन्दू-बहुल क्षेत्र से चुनकर सांसद बनवाती थी। इसके विषय में जल्दी ही विस्तार से एक पोस्ट लिखूंगा।
🔥 भारत के विभाजन के समय तत्कालीन कलात स्टेट (अब बलूचिस्तान) के प्रमुख ख़ान कलात अपने राज्य का भारत के साथ विलय चाहते थे। उनके साथ ही ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार भी चाहते थे कि पाकिस्तान का वर्तमान ख़ैबर पख़्तूनख़्वा राज्य भी भारत में सम्मिलित हो। मगर ये मौलाना अबुल कलाम और नेहरू ही थे जिन्होंने इन राज्यों को भारत में सम्मिलित करने से अपने हाथ पीछे खींच लिए और बलूचिस्तान एवं ख़ैबर पख़्तूनख़्वा को पाकिस्तानी भेड़ियों के सामने नोचने के लिए छोड़ दिया। नेपाल, भूटान और सिक्किम (तब अलग देश था जिसे 1975 में भारत में मिलाया गया) के राष्ट्रप्रमुखों द्वारा इन देशों को भारत में सम्मिलित करने का प्रस्ताव भी मौलाना अबुल कलाम ने नेहरू से रद्द करवा दिया था।
🔥 1947 में जिन्ना का आबादी की अदला-बदली के प्रस्ताव को मौलाना अबुल कलाम ने ही गांधी व नेहरू के द्वारा ठुकरवा दिया था ताकि भारत को फिर से इस्लामिक चंगुल में फंसाया जा सके। इसके अलावा भारत विभाजन के चुनाव के समय भारत के मुसलमानों की तब की जनसंख्या के 7% मुस्लिमों (63 लाख मुस्लिमों) ने मुस्लिम लीग को वोट न देकर कांग्रेस को वोट दिया था। इस हिसाब से इनके हिस्से की ज़मीन 23,000 वर्गमील बनती थी। जब इन्हें भारत में ही रहना था तो मौलाना आज़ाद को सीमा निर्धारण आयोग से कहना चाहिये था कि 7 प्रतिशत मुस्लिमों के हिस्से की 23,000 वर्गमील ज़मीन पाकिस्तान को न दी जाये। मगर मौलाना आज़ाद ने ऐसा कुछ नहीं किया। यदि ये ढंग से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते तो लाहौर, सियालकोट, थारपारकर और उमरकोट जिले भारत में ही रहते।
🔥 अंदर ही अंदर कट्टर इस्लामपरस्त होने के कारण मौलाना अबुल कलाम चाहते थे कि जितनी ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन पाकिस्तान को दी जा सके, उतनी दी जाये और जितने ज़्यादा से ज़्यादा मुसलमान इस देश में रखे जा सकें, उन्हें रखा जाए ताकि भविष्य में इस्लामिक जेहाद के द्वारा भारत को फ़िर से एक इस्लामिक मुल्क बनाया जा सके।
-बाबा इज़राइली 🇮🇱
🔥 हमारे चचा जनाब नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को अपना माँ जाया भाई मानते थे। टेलिफ़ोन पर नेहरु की हमेशा यही कोशिश होती थी कि वह ख़ुद अपने हाथ से मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को फ़ोन मिलाएँ। एक दिन उन्होंने आपने अपने निजी सचिव एम. ओ. मथाई से कहा कि मौलाना साहब से फ़ोन पर बात कराइए। जब मौलाना ने फ़ोन लिया और नेहरु आए तो उनका पहला जुमला था, "जवाहर लाल क्या तुम्हारी उंगलियों में दर्द हो गया है कि तुम दूसरे से फ़ोन मिलवा रहे हो...???"
🔥 आप फ़ौरन मौलाना का आशय समझ गए और बोले आइंदा से ये ग़लती कभी नहीं होगी...!
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🔴 ... बहुत कम लोगों को पता होगा मौलाना अबुल कलाम आजाद के परदादा बंगाल से 17 वी सदी में ऑटोमन एंपायर में जाकर बस गए थे। तब सऊदी अरब नहीं बना था। तुर्की सऊदी अरब सीरिया यानी मध्य पूर्व के बड़े भू-भाग पर ऑटोमन खलीफाओं का राज था। इनके पिता का नाम मोहम्मद खैरुद्दीन बिन अहमद अल हुसैनी था जो मक्का में एक मस्जिद में पेशे ईमाम थे। इनकी माँ शेखा आलिया बिन्त मोहम्मद सऊदी नस्ल की थी जो मदीना के प्रसिद्ध धर्मगुरु शेख मोहम्मद बिन ज़हीर अल वतरी की बेटी थी।
🔥 मौलाना अबुल कलाम पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु थे और इस्लाम पर कई किताब लिख चुके थे। यदि इदारे की बात की जाए तो मौलाना कट्टर देवबंदी अक़ीदे से आते थे और तबलीगी जमात को इस देश का भाग्यविधाता संगठन मानते थे। देश की आजादी के वक़्त वामपंथियों ने नेहरू से एक समझौता किया देश आप चलाओ सिर्फ शिक्षा हमें चलाने दो। उसके बाद वामपंथियों के दबाव में कट्टर इस्लामिक मौलाना अबुल कलाम को शिक्षा मंत्रालय दिया गया ताकि देश से हिंदुत्व का नामोनिशान मिटाया जा सके।
🔥 जिस कांग्रेस ने सऊदी नागरिक, मक्का में जन्मे और पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना अबुल कलाम आजाद उर्फ़ सैयद अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अल अहमद को आजादी के बाद भारत का पहला शिक्षा मंत्री बनाया था उस कांग्रेस ने एक योगी के मुख्यमंत्री बनने पर अपनी छाती कूटी थी।
🔴 "मैं तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दे रहा था, पर तुम तो बेसब्री में उसका एक टुकड़ा लेकर रह गए...!"
-मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
🔥 अगर मुसलमान उतावला नहीं होता और जल्दबाजी की बजाय धैर्य से काम लेते हुए 1947 में भारत का विभाजन नहीं करवाता तो आज पूरा भारत संसद में प्रस्ताव पारित करवाकर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से पाकिस्तान बन गया होता।
🔥 मौलाना अब्दुल कलाम ने मुसलमानों से कहा भी था, "मैं तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दे रहा था, पर तुम तो बेसब्री में उसका एक टुकड़ा लेकर रह गए।"
🔥 उसके बाद ही यह नारा निकला था, "हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिंदुस्तान।"
🔥 कांग्रेसी शासन काल में मुसलमान एकदम शांत होकर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के वक्तव्य से सीख ले कर चुपचाप कार्य कर रहा था परंतु 2014 में मोदी सरकार के आज आने के बाद भारत के मुसलमान को अपना ख़्वाब टूटता हुआ दिखाई पड़ने लगा। इसके फलस्वरूप भारत का मुसलमान फिर से सब्र नहीं रख पाया और उसने अपना वही वीभत्स चेहरा दिखा दिया जो 1947 से पहले अविभाजित भारत के मुसलमान ने अविभाजित भारत में दिखाया था।
🔥 आज भी मुसलमान बेहद उतावला है। कश्मीर, असम, केरल, तेलंगाना से लेकर बंगाल तक पूरा भारत दारुल-इस्लाम बनाने से बस कुछ ही कदम दूर है, शायद 20 वर्ष से भी कम!
🔥 भगवान ने हिंदुओं को सम्भलने का एक और मौका दिया है और यह मौका अंतिम है।
हिन्दुओ सम्भल जाओ और फिर से ऐसी भूल मत करो जो तुम्हें अपनी भूल को याद करने के लिए भी ज़िंदा न छोड़े!
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🔴 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद--: शिक्षा मंत्री के रूप में कट्टर इस्लामी मुजाहिद.......................
🔥 मौलाना अब्दुल कलाम के पूर्वज लुटेरे बाबर के साथ आये थे जिन्होंने भारत को ख़ूब लूटा था। बाद में मौलाना अबुल कलाम के पूर्वज में बंगाल में जाकर बस गए थे जो पुनः 17 वीं शताब्दी में तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य में जाकर रहने लगे। तुर्की के ख़लीफ़ा का पतन हो जाने के पश्चात् मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का परिवार भारत चला आया और यहां भारत में रहकर तुर्की के ख़लीफ़ा को पुनर्स्थापित करने के लिए ख़िलाफ़त आंदोलन से जुड़ गया। मौलाना आज़ाद देवबंदी इस्लामिक संप्रदाय से आते थे। वही देवबंदी संप्रदाय जो विश्व में उग्र इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है।
🔥 दुनिया को दिखाने के लिए मौलाना अबुल कलाम आज़ाद मौखिक रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता की वक़ालत करते थे लेकिन अंदर ही अंदर भारत के ऊपर इस्लामी हुकूमत का ख़्वाब देखा करते थे। स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री रहते हुए मौलाना आज़ाद ने हर वो काम किया जो इस देश की शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को नष्ट करने के लिए काफ़ी था। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद हिंदी के स्थान पर भारत की राष्ट्रभाषा उर्दू रखना चाहते थे। इसके साथ ही मौलाना आज़ाद अरबी भाषा को भी भारत की भाषाओं में सम्मिलित कराना चाहते थे।
🔥 मौलाना आज़ाद ने ख़िलाफ़त आंदोलन के माध्यम से मुस्लिम समुदाय को और कट्टर बनाया। ख़िलाफ़त आंदोलन का मुख्य उद्देश्य तुर्की के ख़लीफ़ा को फिर से उसके स्थान पर बिठाना था जिसे ब्रिटिश शासकों ने उसके स्थान से पदच्युत कर दिया था। यदि सही रूप में देखा जाये तो ख़िलाफ़त आंदोलन के बाद ही भारत के मुसलमान और उग्र हो गये और भारत में रहने वाले ग़ैर-मुस्लिमों की हत्या करने लगे।
🔥 मौलाना आज़ाद हिन्दू-मुस्लिम एकता के नाम पर हमेशा कट्टरपंथी मुसलमानों को ही भारत के अंदर प्रमोट करते रहे और उनके साथ मिलकर पूरे भारत के इस्लामीकरण का सपना देखते रहे।
🔥 यदि सही मायने में देखा जाये तो मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पूरे भारत को मुग़लिस्तान के रूप में देखना चाहते थे। उन्होंने भारत के इस्लामीकरण की वक़ालत करते हुए कहा था कि-
🔥 "भारत जैसे मुल्क को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रहा चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता है और प्रत्येक मुसलमान का ये फ़र्ज़ है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर से प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करे।"
-बी.आर.नन्दा, गांधी पैन इस्लामिज्म, इम्पीरियालज्म एण्ड नेशनलिज्म, पृ. ११७
🔥 मौलाना अबुल कलाम की इस्लामिक कट्टरता को देखकर ही लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इन्हें कभी राष्ट्रवादी नहीं माना था लेकिन घोर आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस अबुल कलाम आज़ाद को हमेशा हिन्दू-बहुल क्षेत्र से चुनकर सांसद बनवाती थी। इसके विषय में जल्दी ही विस्तार से एक पोस्ट लिखूंगा।
🔥 भारत के विभाजन के समय तत्कालीन कलात स्टेट (अब बलूचिस्तान) के प्रमुख ख़ान कलात अपने राज्य का भारत के साथ विलय चाहते थे। उनके साथ ही ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार भी चाहते थे कि पाकिस्तान का वर्तमान ख़ैबर पख़्तूनख़्वा राज्य भी भारत में सम्मिलित हो। मगर ये मौलाना अबुल कलाम और नेहरू ही थे जिन्होंने इन राज्यों को भारत में सम्मिलित करने से अपने हाथ पीछे खींच लिए और बलूचिस्तान एवं ख़ैबर पख़्तूनख़्वा को पाकिस्तानी भेड़ियों के सामने नोचने के लिए छोड़ दिया। नेपाल, भूटान और सिक्किम (तब अलग देश था जिसे 1975 में भारत में मिलाया गया) के राष्ट्रप्रमुखों द्वारा इन देशों को भारत में सम्मिलित करने का प्रस्ताव भी मौलाना अबुल कलाम ने नेहरू से रद्द करवा दिया था।
🔥 1947 में जिन्ना का आबादी की अदला-बदली के प्रस्ताव को मौलाना अबुल कलाम ने ही गांधी व नेहरू के द्वारा ठुकरवा दिया था ताकि भारत को फिर से इस्लामिक चंगुल में फंसाया जा सके। इसके अलावा भारत विभाजन के चुनाव के समय भारत के मुसलमानों की तब की जनसंख्या के 7% मुस्लिमों (63 लाख मुस्लिमों) ने मुस्लिम लीग को वोट न देकर कांग्रेस को वोट दिया था। इस हिसाब से इनके हिस्से की ज़मीन 23,000 वर्गमील बनती थी। जब इन्हें भारत में ही रहना था तो मौलाना आज़ाद को सीमा निर्धारण आयोग से कहना चाहिये था कि 7 प्रतिशत मुस्लिमों के हिस्से की 23,000 वर्गमील ज़मीन पाकिस्तान को न दी जाये। मगर मौलाना आज़ाद ने ऐसा कुछ नहीं किया। यदि ये ढंग से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते तो लाहौर, सियालकोट, थारपारकर और उमरकोट जिले भारत में ही रहते।
🔥 अंदर ही अंदर कट्टर इस्लामपरस्त होने के कारण मौलाना अबुल कलाम चाहते थे कि जितनी ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन पाकिस्तान को दी जा सके, उतनी दी जाये और जितने ज़्यादा से ज़्यादा मुसलमान इस देश में रखे जा सकें, उन्हें रखा जाए ताकि भविष्य में इस्लामिक जेहाद के द्वारा भारत को फ़िर से एक इस्लामिक मुल्क बनाया जा सके।
-बाबा इज़राइली 🇮🇱
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