Tuesday, April 14, 2020

द्रोपदी के बारे में एक काला सच

कौन कहता है कि द्रौपदी के पांच पति थे 200 वर्षों से प्रचारित झूठ का खंडन -👇👇👇
          द्रौपदी का एक ही पति था- युधिष्ठिर

_जर्मन के संस्कृत जानकार मैक्स मूलर को जब विलियम हंटर की कमेटी के कहने पर वैदिक धर्म के आर्य ग्रंथों को बिगाड़ने का जिम्मा सौंपा गया तो उसमे मनु स्मृति, रामायण, वेद के साथ साथ महाभारत के चरित्रों को बिगाड़ कर दिखाने का भी काम किया गया। किसी भी प्रकार से प्रेरणादायी पात्र - चरित्रों में विक्षेप करके उसमे झूठ का तड़का लगाकर महानायकों को चरित्रहीन, दुश्चरित्र, अधर्मी सिद्ध करना था, जिससे भारतीय जनमानस के हृदय में अपने ग्रंथो और महान पवित्र चरित्रों के प्रति घृणा और क्रोध का भाव जाग जाय और प्राचीन आर्य संस्कृति सभ्यता को निम्न दृष्टि से देखने लगें और फिर वैदिक धर्म से आस्था और विश्वास समाप्त हो जाय। लेकिन आर्य नागरिको के अथक प्रयास का ही परिणाम है कि मूल महाभारत के अध्ययन बाद सबके सामने द्रोपदी के पाँच पति के दुष्प्रचार का सप्रमाण खण्डन किया जा रहा है। द्रोपदी के पवित्र चरित्र को बिगाड़ने वाले विधर्मी, पापी वो तथाकथित ब्राह्मण, पुजारी, पुरोहित भी हैं जिन्होंने महाभारत ग्रंथ का अध्ययन किये बिना अंग्रेजो के हर दुष्प्रचार  और षड्यंत्रकारी चाल, धोखे को स्वीकार कर लिया और धर्म को चोट पहुंचाई।_
अब ध्यानपूर्वक पढ़ें---

#विवाह का विवाद क्यों पैदा हुआ था:--

(१) अर्जुन ने द्रौपदी को स्वयंवर में जीता था। यदि उससे विवाह हो जाता तो कोई परेशानी न होती। वह तो स्वयंवर की घोषणा के अनुरुप ही होता।

(२) परन्तु इस विवाह के लिए कुन्ती कतई तैयार नहीं थी।

(३) अर्जुन ने भी इस विवाह से इन्कार कर दिया था। "बड़े भाई से पहले छोटे का विवाह हो जाए यह तो पाप है। अधर्म है।" (भवान् निवेशय प्रथमं)

मा मा नरेन्द्र त्वमधर्मभाजंकृथा न धर्मोsयमशिष्टः (१९०-८)

(४) कुन्ती मां थी। यदि अर्जुन का विवाह भी हो जाता,भीम का तो पहले ही हिडम्बा से (हिडम्बा की ही चाहना के कारण) हो गया था। तो सारे देश में यह बात स्वतः प्रसिद्ध हो जाती कि निश्चय ही युधिष्ठिर में ऐसा कोई दोष है जिसके कारण उसका विवाह नहीं हो सकता।

(५) आप स्वयं निर्णय करें कुन्ती की इस सोच में क्या भूल है? वह माता है, अपने बच्चों का हित उससे अधिक कौन सोच सकता है? इसलिए माता कुन्ती चाहती थी और सारे पाण्डव भी यही चाहते थे कि विवाह युधिष्ठिर से हो जाए।

प्रश्न:-क्या कोई ऐसा प्रमाण है जिसमें द्रौपदी ने अपने को केवल एक की पत्नी कहा हो या अपने को युधिष्ठिर की पत्नी बताया हो ?

#उत्तर:-

(1)-#द्रौपदी को कीचक ने परेशान कर दिया तो दुःखी द्रौपदी भीम के पास आई। उदास थी। भीम ने पूछा सब कुशल तो है? द्रौपदी बोली जिस स्त्री का पति राजा युधिष्ठिर हो वह बिना शोक के रहे, यह कैसे सम्भव है?

आशोच्यत्वं कुतस्यस्य यस्य भर्ता युधिष्ठिरः ।
जानन् सर्वाणि दुःखानि कि मां त्वं परिपृच्छसि ।।-(विराट १८/१)

_द्रौपदी स्वयं को केवल युधिष्ठिर की पत्नि बता रही है।_

(2)- वह भीम से कहती है- जिसके बहुत से भाई, श्वसुर और पुत्र हों,जो इन सबसे घिरी हो तथा सब प्रकार अभ्युदयशील हो, ऐसी स्थिति में मेरे सिवा और दूसरी कौन सी स्त्री दुःख भोगने के लिए विवश हुई होगी-

भ्रातृभिः श्वसुरैः पुत्रैर्बहुभिः परिवारिता ।
एवं सुमुदिता नारी का त्वन्या दुःखिता भवेत् ।।-(२०-१३)

द्रौपदी स्वयं कहती है उसके बहुत से भाई हैं, बहुत से श्वसुर हैं, बहुत से पुत्र भी हैं,फिर भी वह दुःखी है। यदि बहुत से पति होते तो सबसे पहले यही कहती कि जिसके पाँच-पाँच पति हैं, वह मैं दुःखी हूँ,पर होते तब ना ।

(3)-और जब भीम ने द्रौपदी को,कीचक के किये का फल देने की प्रतिज्ञा कर ली और कीचक को मार-मारकर माँस का लोथड़ा बना दिया तब अन्तिम श्वास लेते कीचक को उसने कहा था, *"जो सैरन्ध्री के लिए कण्टक था,जिसने मेरे भाई की पत्नी का अपहरण करने की चेष्टा की थी, उस दुष्ट कीचक को मारकर आज मैं अनृण हो जाऊंगा और मुझे बड़ी शान्ति मिलेगी।"

अद्याहमनृणो भूत्वा भ्रातुर्भार्यापहारिणम् ।
शांति लब्धास्मि परमां हत्वा सैरन्ध्रीकण्टकम् ।।-(विराट २२-७९)

इस पर भी कोई भीम को द्रौपदी का पति कहता हो तो क्या करें? मारने वाले की लाठी तो पकड़ी जा सकती है, बोलने वाले की जीभ को कोई कैसे पकड़ सकता है?

(4)-द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार जाने पर जब दुर्योधन ने उसे सभा में लाने को दूत भेजा तो द्रौपदी ने आने से इंकार कर दिया। उसने कहा जब राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं अपने को दांव पर लगाकर हार चुका था तो वह हारा हुआ मुझे कैसे दांव पर लगा सकता है? महात्मा विदुर ने भी यह सवाल भरी सभा में उठाया। #द्रौपदी ने भी सभा में ललकार कर यही प्रश्न पूछा था -क्या राजा युधिष्ठिर पहले स्वयं को हारकर मुझे दांव पर लगा सकता था? सभा में सन्नाटा छा गया।* किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। तब केवल भीष्म ने उत्तर देने या लीपा-पोती करने का प्रयत्न किया था और कहा था, *"जो मालिक नहीं वह पराया धन दांव पर नहीं लगा सकता परन्तु स्त्री को सदा अपने स्वामी के ही अधीन देखा जा सकता है।"-

अस्वाभ्यशक्तः पणितुं परस्व ।स्त्रियाश्च भर्तुरवशतां समीक्ष्य ।-(२०७-४३)

"ठीक है युधिष्ठिर पहले हारा है पर है तो द्रौपदी का पति और पति सदा पति रहता है, पत्नी का स्वामी रहता है।"

यानि द्रौपदी को युधिष्ठिर द्वारा हारे जाने का दबी जुबान में भीष्म समर्थन कर रहे हैं। यदि द्रौपदी पाँच की पत्नी होती तो वह ,बजाय चुप हो जाने के पूछती,जब मैं पाँच की पत्नी थी तो किसी एक को मुझे हारने का क्या अधिकार था? द्रौपदी न पूछती तो विदुर प्रश्न उठाते कि "पाँच की पत्नि को एक पति दाँव पर कैसे लगा सकता है? यह न्यायविरुद्ध है।"

_स्पष्ट है द्रौपदी ने या विदुर ने यह प्रश्न उठाया ही नहीं। यदि द्रौपदी पाँचों की पत्नी होती तो यह प्रश्न निश्चय ही उठाती।_

इसीलिए भीष्म ने कहा कि द्रौपदी को युधिष्ठिर ने हारा है। युधिष्ठिर इसका पति है। चाहे पहले स्वयं अपने को ही हारा हो, पर है तो इसका स्वामी ही। और नियम बता दिया - जो जिसका स्वामी है वही उसे किसी को दे सकता है,जिसका स्वामी नहीं उसे नहीं दे सकता।

(5)- #द्रौपदी कहती है- "कौरवो ! मैं धर्मराज युधिष्ठिर की धर्मपत्नि हूं।तथा उनके ही समान वर्ण वाली हू।आप बतावें मैं दासी हूँ या अदासी?आप जैसा कहेंगे,मैं वैसा करुंगी।"-

तमिमांधर्मराजस्य भार्यां सदृशवर्णनाम् ।
ब्रूत दासीमदासीम् वा तत् करिष्यामि कौरवैः ।।-(६९-११-९०७)

#द्रौपदी अपने को युधिष्ठिर की पत्नी बता रही है।

(6)- #पाण्डव वनवास में थे दुर्योधन की बहन का पति सिंधुराज जयद्रथ उस वन में आ गया। उसने द्रौपदी को देखकर पूछा -तुम कुशल तो हो?द्रौपदी बोली सकुशल हूं।मेरे पति कुरु कुल-रत्न कुन्तीकुमार राजा युधिष्ठिर भी सकुशल हैं।मैं और उनके चारों भाई तथा अन्य जिन लोगों के विषय में आप पूछना चाह रहे हैं, वे सब भी कुशल से हैं। राजकुमार ! यह पग धोने का जल है। इसे ग्रहण करो।यह आसन है, यहाँ विराजिए।-

कौरव्यः कुशली राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः
अहं च भ्राताश्चास्य यांश्चा न्यान् परिपृच्छसि ।-(१२-२६७-१६९४)

#द्रौपदी भीम,अर्जुन,नकुल,सहदेव को अपना पति नहीं बताती,उन्हें पति का भाई बताती है।

और आगे चलकर तो यह एकदम स्पष्ट ही कर देती है। जब युधिष्ठिर की तरफ इशारा करके वह जयद्रथ को बताती है---

एतं कुरुश्रेष्ठतमम् वदन्ति युधिष्ठिरं धर्मसुतं पतिं मे ।-(२७०-७-१७०१)

"कुरू कुल के इन श्रेष्ठतम पुरुष को ही ,धर्मनन्दन युधिष्ठिर कहते हैं। ये मेरे पति हैं।"

क्या अब भी सन्देह की गुंजाइश है कि द्रौपदी का पति कौन था?

(7)- कृष्ण संधि कराने गए थे। दुर्योधन को धिक्कारते हुए कहने लगे"-- दुर्योधन! तेरे सिवाय और ऐसा अधम कौन है जो बड़े भाई की पत्नी को सभा में लाकर उसके साथ वैसा अनुचित बर्ताव करे जैसा तूने किया। -

कश्चान्यो भ्रातृभार्यां वै विप्रकर्तुं तथार्हति ।
आनीय च सभां व्यक्तं यथोक्ता द्रौपदीम् त्वया ।।-(२८-८-२३८२)

कृष्ण भी द्रौपदी को दुर्योधन के बड़े भाई की पत्नी मानते हैं।
 द्रौपदी का केवल एक ही पति था - युधिस्ठिर। उनका नाम पांचाली इसलिए था क्योकि वो पांचाल नरेश की पुत्री थी , न की पाँच भाइयों की पत्नी। इसके अन्य प्रमाण भी महाभारत में हैं।

अब सत्य को ग्रहण करें और द्रौपदी के पवित्र चरित्र का सम्मान करें।
*विज्ञानवादी बने।*
*भारत को सामर्थ्यशाली बनाएँ !*
साभार.... 💐🙏💐

Saturday, April 11, 2020

अबुल कलाम आजाद का काला सच

🔴 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जन्म-कुंडली...!======!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!


🔥 हमारे चचा जनाब नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को अपना माँ जाया भाई मानते थे। टेलिफ़ोन पर नेहरु की हमेशा यही कोशिश होती थी कि वह ख़ुद अपने हाथ से मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को फ़ोन मिलाएँ। एक दिन उन्होंने आपने अपने निजी सचिव एम. ओ. मथाई से कहा कि मौलाना साहब से फ़ोन पर बात कराइए। जब मौलाना ने फ़ोन लिया और नेहरु आए तो उनका पहला जुमला था, "जवाहर लाल क्या तुम्हारी उंगलियों में दर्द हो गया है कि तुम दूसरे से फ़ोन मिलवा रहे हो...???"

🔥 आप फ़ौरन मौलाना का आशय समझ गए और बोले आइंदा से ये ग़लती कभी नहीं होगी...!
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🔴 ... बहुत कम लोगों को पता होगा मौलाना अबुल कलाम आजाद के परदादा बंगाल से 17 वी सदी में ऑटोमन एंपायर में जाकर बस गए थे। तब सऊदी अरब नहीं बना था। तुर्की सऊदी अरब सीरिया यानी मध्य पूर्व के बड़े भू-भाग पर ऑटोमन खलीफाओं का राज था। इनके पिता का नाम मोहम्मद खैरुद्दीन बिन अहमद अल हुसैनी था जो मक्का में एक मस्जिद में पेशे ईमाम थे। इनकी माँ शेखा आलिया बिन्त मोहम्मद सऊदी नस्ल की थी जो मदीना के प्रसिद्ध धर्मगुरु शेख मोहम्मद बिन ज़हीर अल वतरी की बेटी थी।

🔥 मौलाना अबुल कलाम पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु थे और इस्लाम पर कई किताब लिख चुके थे। यदि इदारे की बात की जाए तो मौलाना कट्टर देवबंदी अक़ीदे से आते थे और तबलीगी जमात को इस देश का भाग्यविधाता संगठन  मानते थे। देश की आजादी के वक़्त वामपंथियों ने नेहरू से एक समझौता किया देश आप चलाओ सिर्फ शिक्षा हमें चलाने दो। उसके बाद वामपंथियों के दबाव में कट्टर इस्लामिक मौलाना अबुल कलाम को शिक्षा मंत्रालय दिया गया ताकि देश से हिंदुत्व का नामोनिशान मिटाया जा सके।

🔥 जिस कांग्रेस ने सऊदी नागरिक, मक्का में जन्मे और पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना अबुल कलाम आजाद उर्फ़ सैयद अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अल अहमद को आजादी के बाद भारत का पहला शिक्षा मंत्री बनाया था उस कांग्रेस ने एक योगी के मुख्यमंत्री बनने पर अपनी छाती कूटी थी।


🔴 "मैं तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दे रहा था, पर तुम तो बेसब्री में उसका एक टुकड़ा लेकर रह गए...!"
-मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

🔥 अगर मुसलमान उतावला नहीं होता और जल्दबाजी की बजाय धैर्य से काम लेते हुए 1947 में भारत का विभाजन नहीं करवाता तो आज पूरा भारत संसद में प्रस्ताव पारित करवाकर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से पाकिस्तान बन गया होता।

🔥 मौलाना अब्दुल कलाम ने मुसलमानों से कहा भी था, "मैं तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दे रहा था, पर तुम तो बेसब्री में उसका एक टुकड़ा लेकर रह गए।"

🔥 उसके बाद ही यह नारा निकला था, "हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिंदुस्तान।"

🔥 कांग्रेसी शासन काल में मुसलमान एकदम शांत होकर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के वक्तव्य से सीख ले कर चुपचाप कार्य कर रहा था परंतु 2014 में मोदी सरकार के आज आने के बाद भारत के मुसलमान को अपना ख़्वाब टूटता हुआ दिखाई पड़ने लगा। इसके फलस्वरूप भारत का मुसलमान फिर से सब्र नहीं रख पाया और उसने अपना वही वीभत्स चेहरा दिखा दिया जो 1947 से पहले  अविभाजित भारत के मुसलमान ने अविभाजित भारत में दिखाया था।

🔥 आज भी मुसलमान बेहद उतावला है। कश्मीर, असम, केरल, तेलंगाना से लेकर बंगाल तक पूरा भारत दारुल-इस्लाम बनाने से बस कुछ ही कदम दूर है, शायद 20 वर्ष से भी कम!

🔥 भगवान ने हिंदुओं को सम्भलने का एक और मौका दिया है और यह मौका अंतिम है।

हिन्दुओ सम्भल जाओ और फिर से ऐसी भूल मत करो जो तुम्हें अपनी भूल को याद करने के लिए भी ज़िंदा न छोड़े!

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🔴 मौलाना अबुल कलाम आज़ाद--: शिक्षा मंत्री के रूप में कट्टर इस्लामी मुजाहिद.......................



🔥 मौलाना अब्दुल कलाम के पूर्वज लुटेरे बाबर के साथ आये थे जिन्‍होंने भारत को ख़ूब लूटा था। बाद में मौलाना अबुल कलाम के पूर्वज में बंगाल में जाकर बस गए थे जो पुनः 17 वीं शताब्दी में तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य में जाकर रहने लगे। तुर्की के ख़लीफ़ा का पतन हो जाने के पश्चात् मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का परिवार भारत चला आया और यहां भारत में रहकर तुर्की के ख़लीफ़ा को पुनर्स्थापित करने के लिए ख़िलाफ़त आंदोलन से जुड़ गया। मौलाना आज़ाद देवबंदी इस्‍लामिक संप्रदाय से आते थे। वही देवबंदी संप्रदाय जो विश्व में उग्र इस्‍लाम को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात है।

🔥 दुनिया को दिखाने के लिए मौलाना अबुल कलाम आज़ाद मौखिक रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता की वक़ालत करते थे लेकिन अंदर ही अंदर भारत के ऊपर इस्लामी हुकूमत का ख़्वाब देखा करते थे। स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री रहते हुए मौलाना आज़ाद ने हर वो काम किया जो इस देश की शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति को नष्ट करने के लिए काफ़ी था। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद हिंदी के स्थान पर भारत की राष्ट्रभाषा उर्दू रखना चाहते थे। इसके साथ ही मौलाना आज़ाद अरबी भाषा को भी भारत की भाषाओं में सम्मिलित कराना चाहते थे।

🔥 मौलाना आज़ाद ने ख़िलाफ़त आंदोलन के माध्यम से मुस्लिम समुदाय को और कट्टर बनाया। ख़िलाफ़त आंदोलन का मुख्‍य उद्देश्‍य तुर्की के ख़लीफ़ा को फिर से उसके स्‍थान पर बिठाना था जिसे ब्रिटिश शासकों ने उसके स्थान से पदच्युत कर दिया था। यदि सही रूप में देखा जाये तो ख़िलाफ़त आंदोलन के बाद ही भारत के मुसलमान और उग्र हो गये और भारत में रहने वाले ग़ैर-मुस्लिमों की हत्‍या करने लगे।

🔥 मौलाना आज़ाद हिन्‍दू-मुस्लिम एकता के नाम पर हमेशा  कट्टरपंथी मुसलमानों को ही भारत के अंदर प्रमोट करते रहे और उनके साथ मिलकर पूरे भारत के इस्‍लामीकरण का सपना देखते रहे।

🔥 यदि सही मायने में देखा जाये तो मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पूरे भारत को मुग़लिस्‍तान के रूप में देखना चाहते थे। उन्होंने भारत के इस्लामीकरण की वक़ालत करते हुए कहा था कि-

🔥 "भारत जैसे मुल्क को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रहा चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता है और प्रत्येक मुसलमान का ये फ़र्ज़ है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर से प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करे।"

-बी.आर.नन्दा, गांधी पैन इस्लामिज्म, इम्पीरियालज्म एण्ड नेशनलिज्म, पृ. ११७

🔥 मौलाना अबुल कलाम की इस्लामिक कट्टरता को देखकर ही लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इन्‍हें कभी राष्‍ट्रवादी नहीं माना था लेकिन घोर आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस अबुल कलाम आज़ाद को हमेशा हिन्‍दू-बहुल क्षेत्र से चुनकर सांसद बनवाती थी। इसके विषय में जल्दी ही विस्तार से एक पोस्ट लिखूंगा।

🔥 भारत के विभाजन के समय तत्कालीन कलात स्टेट (अब बलूचिस्तान) के प्रमुख ख़ान कलात अपने राज्य का भारत के साथ विलय चाहते थे। उनके साथ ही ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार भी चाहते थे कि पाकिस्तान का वर्तमान ख़ैबर पख़्तूनख़्वा राज्य भी भारत में सम्मिलित हो। मगर ये मौलाना अबुल कलाम और नेहरू ही थे जिन्होंने इन राज्यों को भारत में सम्मिलित करने से अपने हाथ पीछे खींच लिए और बलूचिस्तान एवं ख़ैबर पख़्तूनख़्वा को पाकिस्तानी भेड़ियों के सामने नोचने के लिए छोड़ दिया। नेपाल, भूटान और सिक्किम (तब अलग देश था जिसे 1975 में भारत में मिलाया गया) के राष्ट्रप्रमुखों द्वारा इन देशों को भारत में सम्मिलित करने का प्रस्ताव भी मौलाना अबुल कलाम ने नेहरू से रद्द करवा दिया था।

🔥 1947 में जिन्‍ना का आबादी की अदला-बदली के प्रस्‍ताव को मौलाना अबुल कलाम ने ही गांधी व नेहरू के द्वारा ठुकरवा दिया था ताकि भारत को फिर से इस्‍लामिक चंगुल में फंसाया जा सके। इसके अलावा भारत विभाजन के चुनाव के समय भारत के मुसलमानों की तब की जनसंख्या के 7% मुस्लिमों (63 लाख मुस्लिमों) ने मुस्लिम लीग को वोट न देकर कांग्रेस को वोट दिया था। इस हिसाब से इनके हिस्‍से की ज़मीन 23,000 वर्गमील बनती थी। जब इन्‍हें भारत में ही रहना था तो मौलाना आज़ाद को सीमा निर्धारण आयोग से कहना चाहिये था कि 7 प्रतिशत मुस्लिमों के हिस्‍से की 23,000 वर्गमील ज़मीन पाकिस्‍तान को न दी जाये। मगर मौलाना आज़ाद ने ऐसा कुछ नहीं किया। यदि ये ढंग से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते तो लाहौर, सियालकोट, थारपारकर और उमरकोट जिले भारत में ही रहते।

🔥 अंदर ही अंदर कट्टर इस्‍लामपरस्‍त होने के कारण मौलाना अबुल कलाम चाहते थे कि जितनी ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन पाकिस्‍तान को दी जा सके, उतनी दी जाये और जितने ज़्यादा से ज़्यादा मुसलमान इस देश में रखे जा सकें, उन्हें रखा जाए ताकि भविष्य में इस्‍लामिक जेहाद के द्वारा भारत को फ़िर से एक इस्‍लामिक मुल्क बनाया जा सके।

-बाबा इज़राइली 🇮🇱

दुनिया चली सनातन परम्पराओं की तरफ

*🚩 क्या मनुवाद की वापसी हो रही हैं ? 🚩*
*आपने अपने शास्त्रों का एवं ब्राह्मणों का खूब मज़ाक उड़ाया था जब वह यह कहते थे कि जिस व्यक्ति का आप चरित्र न जानते हों, उससे जल या भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए ।*
*क्योंकि आप नहीं जानते कि अमुक व्यक्ति किस विचार का है , क्या शुद्धता रखता है ,कौन से गुण प्रधान का है , कौन सा कर्म करके वह धन ला रहा है , शौच या शुचिता का कितना ज्ञान है , किस विधा से भोजन बना रहा है , उसके लिए शुचिता या शुद्धता के क्या मापदंड हैं इत्यादि !!!*

जिसका चरित्र नहीं पता हो , उसका स्पर्श करने को भी मना किया गया है ।
यह बताया जाता था कि हर जगह पानी और भोजन नहीं करना चाहिए , तब English में american और british accent में आपने इसको मूर्खता और discrimination बोला था !!

बड़ी हँसी आती थी तब !!!! बकवास कहकर आपने अपने ही शास्त्र और ब्राह्मणों को दुत्कारा था ।

*और आज ??????*

यही जब लोग विवाह के समय वर वधु की 3 से 4 पीढ़ियों का अवलोकन करते थे कि वह किस विचारधारा के थे ,कोई जेनेटिक बीमारी तो नहीं , किस height के थे , कितनी उम्र तक जीवित रहे , खानदान में कोई वर्ण संकर का इतिहास तो नहीं रहा इत्यादि ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि आने वाली सन्तति विचारों और शरीर से स्वस्थ्य बनी रहे और बीमारियों से बची रहे , जिसे आज के शब्दों में GENETIC SELECTION बोला जाता है ।

जैसे आप अपने पशु चाहे वह कुत्ता हो या गाय हो का गर्भाधान कराते हैं तो यह ध्यान रखते हैं कि अमुक कुत्ता या बैल हृष्ट पुष्ट हो , बीमारी विहीन हो , अच्छे "नस्ल" का हो । इसीलिए वीर्य bank बना जहाँ अच्छे sperms की उपलब्धता होती है ।
ऐसा तो नहीं कहते न कि इसको जिससे प्रेम हो उससे गर्भाधान करा लें । तब तो समझ रहे हैं न कि आपकी कुतिया या गाय का क्या हश्र होगा और आने वाली generation क्या होगी  !!!!!

*पर आप इन सब बातों पर हंसते थे ।।।*

यही शास्त्र जब बोलते थे कि जल ही शरीर को शुद्ध करता है और कोई तत्व नहीं ,बड़ी हँसी आयी थी आपको !!
तब आपने बकवास बोलकर अपना पिछवाड़ा tissue paper से साफ करने लगे ,खाना खाने के बाद जल से हाथ धोने की बजाय tissue पेपर से पोंछ कर इतिश्री कर लेते थे ।

*और अब ????*

जब यही ब्राह्मण और शास्त्र बोलते थे कि भोजन ब्रह्म के समान है और यही आपके शरीर के समस्त अवयव बनाएंगे और विचारों की शुद्धता और परिमार्ज़िता इसी से संभव है इसलिए भोजन को चप्पल या जूते पहनकर न छुवें ।
बड़ी हँसी आयी थी आपको !! Obsolete कहकर आपने खूब मज़ाक उड़ाया !!! 
जूते पहनकर खाने का प्रचलन आपने दूसरे देशों के आसुरी समाज से ग्रहण कर लिया । Buffet system बना दिया ।
उन लोगों का मजाक बनाया जो जूते चप्पल निकालकर भोजन करते थे ।

अरे हमारी कोई भी पूजा , यज्ञ, हवन सब पूरी तरह स्वच्छ होकर , हाथ धोकर करने का प्रावधान है ।
पंडित जी आपको हाथ में जल देकर हस्त प्रक्षालन के लिए बोलते हैं । आपके ऊपर जल छिड़ककर मंत्र बोलते हैं :-

*ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा ।।*
*यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्यभ्यन्तरः शुचिः ॥*
*ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु ।।*

*तब भी आपने मजाक उड़ाया ।*

जब सनातन धर्मी के यहाँ किसी के घर शिशु का  जन्म होता था तो सूतक लगता था । इस अवस्था में ब्राह्मण 10 दिन , क्षत्रिय 15 दिन , वैश्य 20 दिन और शूद्र 30 दिन तक सबसे अलग रहता है । उसके घर लोग नहीं आते थे , जल तक का सेवन नहीं किया जाता था जब तक उसके घर हवन या यज्ञ से शुद्धिकरण न हो जाये । प्रसूति गृह से माँ और बच्चे को निकलने की मनाही होती थी । माँ कोई भी कार्य नहीं कर सकती थी और न ही भोजनालय में प्रवेश करती थी ।
इसका भी आपने बड़ा मजाक उड़ाया ।।
ये नहीं समझा कि यह बीमारियों से बचने या संक्रमण से बचाव के लिए Quarantine किया जाता था या isolate किया जाता था ।
प्रसूति गृह में माँ और बच्चे के पास निरंतर बोरसी सुलगाई रहती थी जिसमें नीम की पत्ती, कपूर, गुग्गल इत्यादि निरंतर धुँवा दिया जाता था ।
उनको इसलिए नहीं निकलने दिया जाता था क्योंकि उनकी immunity इस दौरान कमज़ोर रहती थी और बाहरी वातावरण से संक्रमण का खतरा रहता था ।
लेकिन आपने फिर पुरानी चीज़ें कहकर इसका मज़ाक उड़ाया और आज देखिये 80% महिलाएँ एक delivery के बाद रोगों का भंडार बन जाती हैं कमर दर्द से लेकर , खून की कमी से लेकर अनगिनत समस्याएं  ।

ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शुद्र के लिए अलग Quarantine या isolation की अवधी इसलिए क्योंकि हर वर्ण का खान पान अलग रहता था , कर्म अलग रहते थे जिससे सभी वर्णों के शरीर की immunity system अलग होता था जो उपरोक्त अवधि में balanced होता था ।

ऐसे ही जब कोई मर जाता था तब भी 13 दिन तक उस घर में कोई प्रवेश नहीं करता था । यही Isolation period था । क्योंकि मृत्यु या तो किसी बीमारी से होती है या वृद्धावस्था के कारण जिसमें शरीर तमाम रोगों का घर होता है । यह रोग हर जगह न फैले इसलिए 14 दिन का quarantine period बनाया गया ।

अरे जो शव को अग्नि देता था  या दाग देता था । उसको घर वाले तक नहीं छू सकते थे 13 दिन तक । उसका खाना पीना , भोजन , बिस्तर , कपड़े सब अलग कर दिए जाते थे । तेरहवें दिन शुद्धिकरण के पश्चात , सिर के बाल हटवाकर ही पूरा परिवार शुद्ध होता था । 

तब भी आप बहुत हँसे थे ।  bloody indians कहकर मजाक बनाया था !!!

जब किसी रजस्वला स्त्री को 4 दिन isolation में रखा जाता है ताकि वह भी बीमारियों से बची रहें और आप भी बचे रहें तब भी आपने पानी पी पी कर गालियाँ दी । और नारीवादियों को कौन कहे  , वो तो दिमागी तौर से अलग होती हैं , उन्होंने जो ज़हर बोया कि उसकी कीमत आज सभी स्त्रियाँ तमाम तरह की बीमारियों से ग्रसित होकर चुका रही हैं ।

जब किसी के शव यात्रा से लोग आते हैं घर में प्रवेश नहीं मिलता है और बाहर ही हाथ पैर धोकर स्नान करके , कपड़े वहीं निकालकर घर में आया जाता है ,  इसका भी खूब मजाक उड़ाया आपने ।

आज भी गांवों में एक परंपरा है कि बाहर से कोई भी आता है तो उसके पैर धुलवायें जाते हैं । जब कोई भी बहूं , लड़की या कोई भी दूर से आता है तो वह तब तक प्रवेश नहीं पाता जब तक घर की बड़ी बूढ़ी लोटे में जल लेकर , हल्दी डालकर उस पर छिड़काव करके वही जल बहाती नहीं हों , तब तक ।

*खूब मजाक बनाया था न ?*

इन्हीं सवर्णों को और ब्राह्मणों को अपमानित किया था जब ये गलत और गंदे कार्य करने वाले , माँस और चमड़ों का कार्य करने वाले लोगों को तब तक नहीं छूते थे जब तक वह स्नान से शुद्ध न हो जाये ।  ये वही लोग थे जो जानवर पालते थे जैसे सुअर, भेड़ , बकरी , मुर्गा , कुत्ता इत्यादि जो अनगिनत बीमारियाँ अपने साथ लाते थे ।
ये लोग जल्दी उनके हाथ का छुआ जल या भोजन नहीं ग्रहण करते थे तब बड़ा हो हल्ला आपने मचाया और इन लोगों को इतनी गालियाँ दी कि इन्हें अपने आप से घृणा होने लगी ।

यही वह गंदे कार्य करने वाले लोग थे जो प्लेग , TB , चिकन पॉक्स , छोटी माता , बड़ी माता , जैसी जानलेवा बीमारियों के संवाहक थे ,और जब आपको बोला गया कि बीमारियों से बचने के लिए आप इनसे दूर रहें तो आपने गालियों का मटका इनके सिर पर फोड़ दिया और इनको इतना अपमानित किया कि इन्होंने बोलना छोड़ दिया और समझाना छोड़ दिया ।

आज जब आपको किसी को छूने से मना किया जा रहा है तो आप इसे ही विज्ञान बोलकर अपना रहे हैं । Quarantine किया जा रहा है तो आप खुश होकर इसको अपना रहे हैं ।

जब शास्त्रों ने बोला था तो ब्राह्मणवाद बोलकर आपने गरियाया था और अपमानित किया था ।

आज यह उसी का परिणति है कि आज पूरा विश्व इससे जूझ रहा है ।

याद करिये पहले जब आप बाहर निकलते थे तो आप की माँ आपको जेब में कपूर या हल्दी की गाँठ इत्यादि देती थी रखने को ।
यह सब कीटाणु रोधी होते हैं। 
शरीर पर कपूर पानी का लेप करते थे ताकि सुगन्धित भी रहें और रोगाणुओं से भी बचे रहें ।

लेकिन सब आपने भुला दिया ।।

आपको तो अपने शास्त्रों को गाली देने में और ब्राह्मणों को अपमानित करने में , उनको भगाने में जो आनंद आता है शायद वह परमानंद आपको कहीं नहीं मिलता ।

अरे गधों !! अपने शास्त्रों के level के जिस दिन तुम हो जाओगे न तो यह देश विश्व गुरु कहलायेगा । 

तुम ऐसे अपने शास्त्रों पर ऊँगली उठाते हो जैसे कोई मूर्ख व्यक्ति के मूर्ख 7 वर्ष का बेटा ISRO के कार्यों पर प्रश्नचिन्ह लगाए ।

अब भी कहता हूँ अपने शास्त्रों का सम्मान करना सीखो । उनको मानो  ।  बुद्धि में शास्त्रों की अगर कोई बात नहीं घुस रही है तो समझ जाओ आपकी बुद्धि का स्तर उतना नहीं हुआ है । उस व्यक्ति के पास जाओ जो तुम्हे शास्त्रों की बातों को सही ढंग से समझा सके ।

अरे कुछ भी हो मुझसे ही पूछ लिया करो शायद मैं ही कुछ मदद कर दूँ । लेकिन गाली मत दो , उसको जलाने का दुष्कृत्य मत करो ।

*आपको बता दूँ कि आज जो जो Precautions बरते जा रहे हैं , मनुस्मृति उठाइये , उसमें सभी कुछ एक एक करके वर्णित है ।*

लेकिन आप पढ़ते कहाँ हैं , दूसरे गधों की बातों में आकर प्रश्नचिन्ह उठायेंगे और उन्हें जलाएंगे ।

यह पोस्ट वैसे ही लम्बी हो गयी है अन्यथा वह सारी बातें यहाँ श्लोक सहित डालता ।
काश एक platform मिलता और mic मिल जाता तो घण्टों घण्टों बोलता और आपको एक एक अवयव से रूबरू करवाता और पूरी तरह वैज्ञानिक दृष्टिकोण लेकर ।
क्योंकि जिसने विज्ञान का गहन अध्ययन किया होगा , वह शास्त्र वेद पुराण इत्यादि की बातों को बड़े ही आराम से समझ सकता है , corelate कर सकता है और समझा भी सकता है ।

*भले अभी इस निकृष्ट / वैश्विक संविधान की आप लोग दुहाई दे रहे हों ।*
*लेकिन मेरी यह बात स्वर्ण अक्षरों में लिख लीजिये कि मनुस्मृति से सर्वश्रेष्ठ विश्व में कोई संविधान नहीं बना है और एक दिन पूरा विश्व इसी मनुस्मृति संविधान को लागू कर इसका पालन करेगा ।*
Note it down !! Mark my words again !!

*मुझे आप गालियाँ दे सकते हैं । 😊*

मुझे नहीं पता कि आप इतनी लंबी पोस्ट पढ़ेंगे या नहीं लेकिन मेरा काम है आप लोगों को जगाना , जिसको जगना है या लाभ लेना है वह पढ़ लेगा ।
यह भी अनुरोध करता हूँ कि सभी *ब्राह्मण* बनिये ( भले आप किसी भी जाति से हों ) और *ब्राह्मणत्व* का पालन कीजिये इससे इहलोक और परलोक दोनों  सुधरेगा...

*🚩 🙏🕉जय श्री कृष्ण, जय जय श्री राधे 🕉🙏🚩*

Saturday, March 28, 2020

कोरोना चीनी जैविक हमला

चीनी वॉर का तीसरा चरण;-

अब कोरोना नहीं वामपंथी स्लीपर सेल सक्रिय हो चुका है।

इन्होंने ही अफवाह फैलाई कि लोकडाउन 3 से 6 माह चल सकता है।

मजदूरों का पलायन और उस पर टीवी चैनल्स के समाचार, गरीबों की चिंता, भूख का व्यापार

केजरीवाल ने दिल्ली दंगों की ही तरह लम्बी ओढ़ ली है। पर्दे के पीछे टुकड़े गैंग सक्रिय हैं।

6 हफ्ते गुजर गए

800 के आस-पास कोरोना संक्रमित लगभग 20 की मौत उसमें भी 80% की मुख्य वजह कोरोना नहीं

ऊपर से 135 करोड़ की आबादी का देश

ये तो चीन निर्मित "बायलोजिकल हथियार" की घोर बेइज्जती थी देवभूमि भारत में

जहाँ एक तरफ कुछ दिनों तक चीनी वायरस चीनी वायरस चिल्लाने वाला सुपर पावर अमेरिका सरेंडर कर शैतान जिंगपिंग की तारीफ़ पर उतर आया तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना के कहर के कराह रहा पूरा यूरोप भारी खरीददारी कर रहा था चीन से

परंतु ये क्या

दुनिया की सबसे बड़ी मार्केट घांस नहीं डाल रही थी, शैतान चीन के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखने लगीं, उसे लगा कि उसका मिशन सिंहासन  (कोरोना) तो फेल ही हो जायेगा यदि भारत उसकी शरण में नहीं आया तो

वहीं दूसरे ही स्टेज में एक दिन का जनता कर्फ्यू फिर 21 दिनों का लाकडाऊन कर पूरा देश अपने नायक के पीछे चल रहा था

अतंत: चालाक चीन ने अपना आखिरी पासा फेंका और भारत की सबसे कमजोर नस को दबा दिया

जी हां

उसने खोला अपने खजाने का मुंह और खरीद लिया देश के कुछ बड़े देशद्रोही पत्तलकारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ चैनलों को

जगा दिया वामपंथ के स्लीपर सेल्स को

पहले 21 दिनों तक गरीब दिहाड़ी मजदूर कैसे रहेंगे ,का रोना रोया जाना शुरू किया गया फिर एक-दो परिवारों की पैदल यात्रा का 24 घंटे एैसे कवरेज किया जाने लगा कि जैसे पूरा देश ही पैदल चल पड़ा

फिर धर्म के नाम पर एक संप्रदाय विशेष को मोर्चे पर लगा दिया गया

अब ये चाल सफल होती दिख रही है

कुछ झूठे नक्सली नेता आम मजदूरों को भड़का कर की 6 महीने का कर्फ्यू लगने वाला है

बसों से दूसरे प्रदेश की सीमाओं तक लाखों मजदूरों को छोड़ने लगे और सफल कर दिया शैतान की चालों को

देश को बैठा दिया जाग्रित ज्वालामुखी के मुहाने पर

वहीं पैदल मार्च करने वालों के लिए कुछ लोगों की छाती में दूध उतर आया जो सोशल मीडिया पर सिर्फ विरोध के नाम पर विरोध करते रहते हैं

जब देश युद्ध या किसी बड़े संकट में फंसता है तो हर नागरिक युद्ध का हिस्सा होता है

हर नागरिक को परेशानी उठानी पड़ती है

हर नागरिक को त्याग करना पड़ता है

युद्ध सिर्फ सेनायें ही नहीं लड़ती हैं

परंतु गद्दारों और बिकाऊ लोगों की प्रचुर उत्पादकता से गमगीन ये देश एैसी परिस्थिति का हर समय से ही सामना करता आया है

सुनों हम फिर भी जीत जायेंगे

हमने विश्व विजेता सिकंदर को उल्टे पांव वापस किया है

हम शैतान चीन की हर चाल का जबाब देंगे वो भी भरपूर

परंतु देश के अंदर ही कुछ लोग और संस्थायें एक बार फिर सड़कों पर नंगी हो रही हैं जिन्हें देखना और सुनना बहुत कष्टदायक है !!!

#हे_राम